विरह में भी मुस्करा के, गीत गाते हम रहेंगे।
मिलन चाहे हो न पाए, मुस्कुराते हम रहेंगे।
धूल में जो मिल भी जाएँ,
दूर तक हम संग चलेंगे।
हो कठिन राहें भले ही,
खा के ठोकर फिर उठेंगे।
प्यार का संदेश देने,
प्यार के पथ पर चलेंगे।
मिलन चाहे...।
फिर ना टूटेगा ये बंधन,
लाख कोशिश कर ले कोई।
प्रिय तुम्हारे नव नयन में,
प्रीत है मेरी जो सोई।
स्वप्न के मधु कल्पना के,
डाल पर खिलते रहेंगे।
मिलन चाहे...।
रह न जाए बात बाकी,
अर्चना के गीत मेरे।
अब न छूटे हाथ साथी,
अल्पना के गीत मेरे।
भाव से रस सिक्त होकर,
इंद्रधनुषी रंग भरेंगे।
मिलन चाहे...।
जिंदगी की राह में अब,
प्रीत की वो रीति लिख दूँ।
साधना के उस समर को,
आज की रणनीति लिख दूँ।
मदभरे संचित नयन से,
तुमको छलते हम रहेंगे।
मिलन चाहे...।